Happy Teachers Day | शिक्षक से सम्बंधित महत्वपूर्ण कोटेशन

Happy Teachers Day अर्थात शिक्षक दिवस की शुभकामना सम्बंधित मैसेज का कलेक्शन हमारे पाठकों के लिए प्रस्तुत है.

शिक्षक प्रत्येक कालखंड में युग निर्माता है बशर्ते वह एक शिक्षक हो।

गुरु कौन है? Who is the Guru?

जिन्होंने हम में कुछ देखा, जो हम भी नहीं समझ पाए थे जिन्होंने हमें एहसास दिलाया कि, हम में भी कुछ बात है गुरु वह हैं, वे ही हैं।

जब आए गम के साए, हम हो गए विचलित भावुक उन्होंने अखण्ड प्रकाश बनकर, हमें धीरज का पाठ पढ़ाया गुरु वह हैं, वे ही हैं।

जब आई कठिन चुनौती, हम थोड़ा घबराए सकुचाये, उन्होंने सदैव सारथी बनकर, हमें उन्नति का मार्ग दिखाया गुरु वह हैं, वे ही हैं।

जिंदगी के कई प्रश्न थे, भगवान हैं भी कि नहीं उन्होंने कई भेद खोल कर, हमें अध्यात्म से परिचित कराया गुरु वह है, वे ही हैं।

क्या गुरु वे ही हैं जो कक्षा में पाठ पढ़ाएं, वह तो हैं ही पर वे भी हैं जो जीवन के नित सबक सिखाएं, मात-पिता भाई बंधु सब गुरु ही हैं, गुरु वो भी हैं।

कभी लगता है कि कैसे उनका ऋण उतारें, वह कहते और कुछ नहीं, बस दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाओ गुरु वह हैं, वे ही हैं गुरु वे हैं, वे ही हैं।।

शिक्षक बनाता है लोहे को सोना | teacher turns iron into gold

आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

जो बनाता है इंसान को इंसान, जिसे करते हैं सभी प्रणाम, जिसकी छाया मे मिलता है ज्ञान, जो कराये सही दिशा की पहचान, मेरे उस गुरु को शत-शत प्रणाम…

किसी ने शिक्षक से पूछा – क्या करते है आप? | Someone asked the teacher – what do you do?

किसी ने शिक्षक से पूछा-
क्या करते हो आप ?
शिक्षक का सुन्दर जवाब देखिए-
सुन्दर सुर सजाने को साज बनाता हूँ ।
नौसिखिये परिंदों को बाज बनाता हूँ ।।
चुपचाप सुनता हूँ शिकायतें सबकी ।
तब दुनिया बदलने की आवाज बनाता हूँ ।।
समंदर तो परखता है हौंसले कश्तियों के ।
और मैं,
डूबती कश्तियों को जहाज बनाता हूँ ।।
बनाए चाहे चांद पे कोई बुर्ज ए खलीफा ।
अरे मैं तो कच्ची ईंटों से ही ताज बनाता हूँ ।।

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🇮🇳🇮



आज शिक्षक दिवस है, गुरु दिवस क्यों नहीं ? Today is Teacher’s Day, why not Guru’s Day?

वर्ष के 365 दिन में से एक दिन शिक्षक को समर्पित कर देना भारतीय संस्कृति नहीं है; यहाँ तो पूरा जीवन ही समर्पित करना पड़ता है, हर दिन समर्पित करना पड़ता है। हाँ, विश्व शिक्षक दिवस (जो कि 5 अक्टूबर को मनाया जाता है ) की तर्ज़ पर अपने यहाँ 5 सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रपति पद को सुशोभित करनेवाले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जो एक महान् शिक्षक के रूप में ख्यात थे) के जन्म दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

वस्तुतः, गुरु पूर्णिमा की महिमा ज्यादा है, परंतु उसकी प्रवृत्ति भिन्न है। गुरु पूर्णिमा अधिक प्रतीकात्मक है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाने के पीछे कारण यह है कि आषाढ़ पूर्णिमा के दिन अमूमन आकाश में घने बादल छाए रहते हैं। प्रतीकात्मक रूप से इन अँधियारे बादलों को शिष्य और पूर्णिमा के चाँद को गुरु माना गया है। अगर सिर्फ चाँद को देखना होता तो, शरद पूर्णिमा को चुना जाता परंतु गुरु की महिमा तो शिष्यों के कल्याण से ही है।

आशा की जाती है कि जैसे चाँद के प्रकाश से अँधियारे बादलों में भी प्रकाश प्रकीर्तित, परावर्तित होता है, वैसे ही हमारे जीवन में भी गुरु की ज्ञान-रश्मियाँ फैलें। यह अलग बात है कि इसी दिन वेद व्यास जी का भी जन्मदिन बताया जाता है।

गुरु और शिक्षक में अंतर है। गुरु ज्ञान देता है, शिक्षक शिक्षण करता है। गुरु-शिष्य की एक परंपरा है, जिसमे गुरु के पीछे जुड़कर शून्य या नगण्य (अ) भी विशिष्ट हो जाता है– गुरु +अ = गौरव।

वैदिक ज्ञान

शिक्षक तो शिक्षा के निमित्त (अर्थ) आए हर शिक्षार्थी के लिए शिक्षण का कार्य करता है। 5 सितंबर राष्ट्र निर्माण में उन सभी शिक्षकों के महनीय योगदान को रेखांकित करने वाला दिन है।

गुरु से यह अपेक्षा रहती है वह शिक्षा ग्रहण करने आए शिक्षार्थी (छात्र) को शिष्य बना दे। छात्र होना तो एक अवस्था है। छात्र तो वह है, जो गुरु के सान्निध्य में रहता है- छात्र का अर्थ ही है : वह जो गुरु पर छत्र (छाता) लगाकर उसके पीछे चलता है। गुरुकुल में गुरु के पीछे उनके छात्र छत्र उठा कर चलते थे। शिष्य होना एक गुण है जिसे शिष्यत्व कहते हैं। शिष्य का अर्थ है जो सीखने को राजी हुआ, जो झुकने को तैयार हो…जिससे उसका जीवन उत्कर्ष की ओर जाए।

गुरु और शिष्य एक परंपरा बनाते हैं। उनमें सिर्फ शाब्दिक ज्ञान का ही आदान-प्रदान नहीं होता। गुरु तो शिष्य के संरक्षक के रूप में कार्य करता है। वह ज्ञान प्रदाता होता है, अपना ज्ञान शिष्य को देता है; जो कालांतर में पुनः यही ज्ञान अपने शिष्यों को देता है। यही गुरु-शिष्य-परंपरा है अथवा परम्पराप्राप्तमयोग है।

शिक्षक और छात्र एक परंपरा नहीं बनाते। शिक्षक तो अधिगम( learning) को सरल बनाता है, इसलिए अँगरेज़ी में उसे fecilitator of learning कहते हैं। विद्यालय जाकर विद्या की आकांक्षा रखने वाला विद्यार्थी (विद्या +अर्थी) छात्र भी हो जाता है, जबकि बिना गहन विनम्रता के शिष्य नहीं होता, शिष्यत्व घटित ही नहीं हो सकता।

शिक्षक की चाहत | teacher’s desire

हर कोई चाहता हैं कि आप बेहतर बने……लेकिन एक शिक्षक ही हैं जो ये चाहता हैं कि आप मुझसे भी बेहतर बने……
Happy teacher’s day 🌹🌹

अच्छा शिक्षक कौन है? | who is a good teacher

“अच्छा शिक्षक वह है जो जीवन पर्यन्त विद्यार्थी बना रहता है। और इस प्रक्रिया में वह केवल किताबों से ही नहीं अपितु विद्यार्थियों से भी सीखता है ।”

डॉ. सर्वपिल्ले राधाकृष्णन

सभी शिक्षकों के लिये..!!

कविता के माध्यम से प्रस्तुति

मत पूछिए कि
शिक्षक कौन हैं..?
आपके प्रश्न का सटीक
उत्तर आपका मौन हैं….

शिक्षक न पद हैं,
न पेशा हैं, न व्यवसाय हैं,
ना ही गृहस्थी चलाने वाली
कोई आय हैं…

शिक्षक सभी धर्मों से
ऊंचा धर्म हैं, गीता में उपदेशित
“मा फलेषु “वाला कर्म हैं…”

शिक्षक एक प्रवाह हैैं,
मंज़िल नहीं राह हैं,
शिक्षक पवित्र हैं,
महक फैलाने वाला इत्र हैं,
शिक्षक स्वयं जिज्ञासा हैं,
खुद कुआं हैं पर प्यासा हैं…

वह डालता हैं चांद सितारों
तक को तुम्हारी झोली में,
वह बोलता हैं बिल्कुल
तुम्हारी बोली में…

वह कभी मित्र, कभी माँ तो
कभी पिता का हाथ हैं,
साथ ना रहते हुए भी
ताउम्र का साथ हैं….

वह नायक, खलनायक तो
कभी विदूषक बन जाता हैं,
तुम्हारे लिए न जाने,
कितने मुखौटे लगाता हैं….

इतने मुखौटों के बाद भी वह
समभाव हैं, क्योंकि…यही तो
उसका सहज स्वभाव हैं…

शिक्षक कबीर के गोविंद
सा बहुत ऊंचा हैं,
कहो भला कौन
उस तक पहुंचा हैं…

वह न वृक्ष हैं, न पत्तियां हैं,
न फल हैं, वह केवल खाद हैं,
वह खाद बनकर
हजारों को पनपाता हैं,
और खुद मिट कर
उन सब में लहराता हैं….

शिक्षक एक विचार हैं,
दर्पण हैं, संस्कार हैं
शिक्षक न दीपक हैं, न बाती हैं,
न रोशनी हैं, वह स्निग्ध तेल हैं
क्योंकि… उसी पर दीपक का
सारा खेल हैं….

शिक्षक तुम हो, तुम्हारे भीतर की
प्रत्येक अभिव्यक्ति हैं,
कैसे कह सकते हो
कि वह केवल एक व्यक्ति हैं…

शिक्षक चाणक्य, सान्दिपनी
तो कभी विश्वामित्र हैं,
गुरु और शिष्य की प्रवाही
परंपरा का चित्र हैं….

शिक्षक भाषा का मर्म हैं,
अपने शिष्यों के लिए धर्म हैं,
साक्षी और साक्ष्य हैं,
चिर अन्वेषित लक्ष्य हैं,
शिक्षक अनुभूत सत्य हैं,
स्वयं एक तथ्य हैं…

शिक्षक ऊसर को उर्वरा
करने की हिम्मत हैं,
स्व की आहुतियों के द्वारा
पर के विकास की कीमत हैं…

वह इंद्रधनुष हैं,
जिसमें सभी रंग है,
कभी सागर हैं, कभी तरंग हैं…

वह रोज़ छोटे – छोटे
सपनों से मिलता हैं,
मानो उनके बहाने
स्वयं खिलता हैं….

वह राष्ट्रपति होकर भी पहले
शिक्षक होने का गौरव हैं,
वह पुष्प का बाह्य सौंदर्य नहीं,
कभी न मिटने वाली सौरभ हैं…

बदलते परिवेश की आंधियों में
अपनी उड़ान को जिंदा
रखने वाली पतंग हैं,
अनगढ़ और बिखरे विचारों के
दौर में, मात्राओं के दायरे में
बद्ध भावों को अभिव्यक्त
करने वाला छंद हैं….

हाँ अगर ढूंढोगे तो उसमें
सैकड़ों कमियां नजर आएंगी,
तुम्हारे आसपास जैसी ही
कोई सूरत नजर आएगी….

लेकिन यकीन मानो जब वह
अपनी भूमिका में होता हैं,
तब जमीन का होकर भी
वह आसमान सा होता हैं…

अगर चाहते हो उसे जानना,
ठीक – ठीक पहचानना,
तो सारे पूर्वाग्रहों को
मिट्टी में गाड़ दो,
अपनी आस्तीन पे लगी
अहम् की रेत झाड़ दो…

फाड़ दो वे पन्ने जिनमें
बेतुकी शिकायतें हैं,
उखाड़ दो वे जड़े
जिनमें छुपे निजी फायदे हैं…

फिर वह धीरे-धीरे स्वतः
समझ आने लगेगा,
अपने सत्य स्वरूप के साथ
तुम में समाने लगेगा….!!

🙏 सभी शिक्षकों को समर्पित 🙏

गुरु के चरणों में।

जब इंसान श्रद्धा से, भावना से, प्रेम से, विनम्रता से गुरु के चरणों मे माथा टेकता है उसकी उल्टी रेखाएं सीधी ही जाती है।

  • समस्त गुरुजन को मेरा दण्डवत प्रणाम वंदन नमन

गुरु को सम्पूर्ण राष्ट्र द्वारा नमन

ये मेरा भारत है
जहाँ देवताओं से पहले
अपने गुरुओं का नाम लिया जाता है।
मेरा नमन् !!!!

ये मेरा भारत है
जहाँ भगवान् जी की आरती के साथ
गुरु की वंदना की जाती है।
मेरा नमन् !!!!

ये मेरा भारत है
जहाँ गुरु को
राष्ट्र निर्माण कर्ता के रूप में जाना जाता है।
मेरा नमन् !!!!

ये मेरा भारत ही है
जहॉ गुरु दक्षिणा के लिये अपना
सर्वस्व न्योछावर किया जाता है।
मेरा नमन् !!!!

ऐसे भारत और उसके गुरुओं को
मेरा सदैव सादर प्रणाम।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

शिक्षक दिवसकी हार्दिक शुभ कामनाये

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