अध्यापक योजना डायरी संधारण हेतु दिशा-निर्देश

किसी भी कार्य को करना तब सरल हो जाता है जब उस कार्य की प्रभावी योजना को बनाकर उसे प्रारंभ किया जाए। प्रत्येक अध्यापक से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी कक्षा व विषय के अनुसार अध्यापक योजना डायरी बना कर शिक्षण कार्य सम्पादित करे।

मेरी योजना डायरी

  • यह मेरी अपनी शिक्षण एवं आकलन योजना डायरी है।
  • इस योजना डायरी में मुझे कक्षा में जाने से पूर्व सीखने-सिखाने के तौर-तरीकों का नियोजन बच्चे को केन्द्र में रखकर करना है।
  • योजना का निर्माण बेसलाइन / प्लेसमेंट आकलन के आधार पर ही समूह आधारित किया जाना है। अध्यापक योजना डायरी में शिक्षण नियोजन हेतु मुझे बच्चों की बेसलाइन पाठ्यक्रम विभाजन उनकी अन्तनिर्हित क्षमताओं/ अनुभवों, अधिगम क्षेत्रों व आकलन सूचकों को ध्यान में रखना होगा।
  • मेरे द्वारा पढ़ाई जाने वाली विभिन्न कक्षाओं व विषयों का नियोजन विद्यालय समय-सारणी के क्रम के अनुसार करना है तथा इस क्रम को डायरी के मुखपृष्ठ पर अंकित करना है। मैं इस डायरी को प्रस्तावित गतिविधियों, आकलन योजना, समीक्षा व अनुभव के साथ समन्वित रूप से देख रहा / रही हूँ।
  • समीक्षा व अनुभव से प्राप्त परिणामों को रचनात्मक आकलन के रूप में पृथक से दी गई चैकलिस्ट पुस्तिका में दर्ज करूंगा/करूंगी।
  • इस योजना डायरी में समूह से मेरा तात्पर्य “कक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु आवश्यक योग्यता / दक्षता से है तथा “समूह 2 से मेरा तात्पर्य कक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु आवश्यक योग्यता / दक्षता का अपेक्षित स्तर नहीं होने से है अतः सदनुसार ही में शिक्षण योजना का निर्माण करूंगा / करूंगी।
  • इस योजना डायरी के किसी भी प्रारूप की अतिरिक्त आवश्यकता होने पर मैं उस प्रारूप के अतिरिक्त पृष्ठ संयोजित करूँगा / करूँगी।
  • इस डायरी में मेरे द्वारा बनाई गई पाक्षिक योजना को संस्था प्रधान के साथ साझा कर उनके करूँगा / करूँगी।
  • मुझे अपनी डायरी को मासिक कार्यशाला / प्रशिक्षण में लेकर जाना है, वहां दक्ष प्रशिक्षक एवं साथियों के साथ नियोजन की गुणवत्ता के उन्नयन के लिए इसे साझा करते हुए सुझाव प्राप्त करने हैं।

योजना डायरी को संधारित करने से पूर्व निर्देशों का अवलोकन एवं अध्ययन करके ही योजना बनाने का कार्य प्रारंभ करें डायरी के प्रत्येक प्रारूप की पूर्ति हेतु निर्देश निम्नानुसार है

  1. मुख पृष्ठ

● अध्यापक योजना धरी के मुख पृष्ठ को समस्त को समय-सारणी के अनुसार कथाओं एवं के जिन के आधार पर संधारित करें।

2. प्रारूप 1 : विद्यार्थी विवरण

यह प्रारूप डायरी में निर्धारित 5 स्थान (पंज सं. 34, 55-56, 107-108, 157 158 एवं 207-208) पर संलग्न है। जिसकी पूर्ति शिक्षक द्वारा कक्षाओं और विषयों के साथ समस्त अध्ययनरत विद्यार्थियों के नाम दर्ज करते हुए की जानी है।

3. प्रारूप 2 अधिगम स्तर एवं आवश्यकताओं के अनुसार कक्षा में विद्यार्थियों के समूहों की स्थिति व लक्ष्य ● इस योजना डायरी में समूह से तालाई प्रत्येक कक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु आवश्यक योग्यता दक्षता से है तथा समूह 2 से तात्पर्य कक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु आवश्यक योग्यता दक्षता का अपेक्षित स्तर नहीं होने से है।

समूह 1 • टर्म के आरम्भ में स्तर का स्तर के विद्यार्थियों का टर्म आरम्भ होने से पूर्व का स्तर मिनी के रूप में दर्ज किया जाना है। • समूह में सम्मिलित विद्यार्थियों के नाम समूहों के नाम लिखे जाने हैं।

समूह -2 • टर्म के आरम्भ में स्तर नामांकित कक्षा से न्यून स्तर के विद्यार्थियों का अधिगम स्तर टिप्पणी के रूप में दर्ज किया जाना है। ● समूह में सम्मिलित विद्यार्थियों के नाम :- समूह-2 के विद्यार्थियों के नाम लिखे जाते हैं। टर्म के अंत तक के लिए निर्धारित लक्ष्य विद्यार्थी जो अपनी नामांकित कक्षा स्तर से न्यून सार के है उन्हें नामांकित कक्षा स्तर तक लाने हेतु निर्धारित लक्ष्यों में से इस टर्म हेतु चयनित लक्ष्यों को बिन्दुवार लिखना है।

  1. प्रारूप शिक्षण आकलन योजना

प्रत्येक शिक्षक द्वारा पाक्षिक शिक्षण आकलन योजना तैयार कर शिक्षण कार्य किया जाना है। इसे निम्नानुसार संचारित किया जाए सर्वप्रथम टर्म का विषय और योजना क्रमांक आवश्यक रूप से अंकित करें। पाठ अवधारणा थीय घटक इत्यादि की विषय की प्रकृति पावभाजन में दिए गए अधिगम क्षेत्र अधिगम प्रतिफल के आधार पर लिखा जाता है।

शिक्षक योजना बनाते समय उस पक्ष में आने वाले कार्य दिवसों की संख्या के आधार पर ही करें।

1. पाक्षिक योजना बनाते समय सर्वप्रथम समूह 1 व समूह -2 के विद्यार्थियों के रोल नम्बर अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं।

सम्पूर्ण कक्षा के लिए सीखने के प्रतिफल के आधार पर शिक्षण अधिगम उद्देश्य इस कॉलम के अन्तर्गत पाक्षिक योजना हेतु शिक्षण अधिगम उद्देश्यों को विषयवस्तु के अनुसार पाठ्यक्रम विभाजन पुस्तिका के आधार पर लिखा जाना है। सम्पूर्ण कक्षा के लिए प्रस्तावित गतिविधियाँ इस कॉलम में सम्पूर्ण कक्षा की सामूहिक उपसमूह एवं व्यक्तिगत गतिविधियों का उल्लेख करें यदि योजनानुसार अनुसार कोई एक गतिविधि सामूहिक उपसमूह वक्तिगत तीनों प्रकार या कोई दो प्रकार से करवाई जा सकती है तो उसे एक ही बार लिखकर कोष्ठक में उसके प्रकार लिखे जाने हैं जिससे में अधिकतम गतिविधियों को समाहित किया जा सके।

अध्यापक योजना डायरी में शिक्षण नियोजन विद्यार्थियों को बेसलाइन / पदस्थापन से प्राप्त स्ता, पाठ्यक्रम विभाजन, उनको अन्तनितिमाओं/अनुभव अधि सूचकों पर आधारित होगा।

सतत् आकलन योजना इस कॉलम में शिक्षण कार्य के दौरान को जाने वालों के अनुसार सतत आकलन योजना का निर्माण कर उल्लेखित करें। इसके अन्तर्गत विद्यार्थियों द्वारा सीख गई दक्षताओं का आकलन करने हेतु शिक्षकद्वारा किए जाने वाले आकलन का था प्रश्न गतिविधि अन्य कार्य का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

समूह -1 के लिए क्षमता संवर्धन योजना कालम के अन्तसमूह में रहते हुए भी उस उपलब्धि स्तर के हैं। उनके लिए संवर्धन हेतु किए जा अतिरिक्त कार्यों का उल्लेख किया जाये।

कक्षा में समूह 2 होने को स्थिति में शिक्षण उद्देश्य कॉलम के अन्तर्गत समूह 2 हेतुउद्देश्य लिखकर योजना चैकलिस्ट में निर्धारित स्थान पर उल्लेखित दक्षताओं के अनुसार बनाई जाए जिससे इस समूह के विद्यार्थियों के व्यक्तिगत कक्षा स्तर के अनुसार गतिविधि आधारित अतिरिक्त कार्य करवाया जा सके। पाक्षिक शिक्षण योजना से प्राप्त सीखने के प्रतिफल (अधिगम उपलब्धि) शिक्षण योजना में निर्धारित किए गए उद्देश्यों के अधिगम प्रतिफल की प्राप्ति का उल्लेख किया जाना है जो कि पाठ्यक्रम पुस्तिका में कक्षावार एवं विषयवार निर्धारित किए गए हैं। समीक्षा एवं अनुभव यह महत्वपूर्ण कॉलम है जो आपको योजना का मूल्यांकन करने का अवसर देता है। इस कॉलम में गोजना के दौरान बच्चों को सहभागिता कठिनाई के अनुसार होने वाले बदलाव के बारे में उल्लेख किया जाना है। इसमें साप्ताहिक स्तर पर योजना का मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है ताकि आवश्यकता होने पर इससे परिवर्तन किया जा सके। पाक्षिक समीक्षा में पूरी योजना के बारे में मूल्यांकन किया जाना है। संस्था प्रधान अभिमत इस कॉलम में संस्था प्रधान द्वारा योजना की क्रियान्वित के दौरान कक्षा-कक्षीय निरीक्षण कर योजना के उद्देश्य के अनुसार प्राप्त अधिगम प्रतिफल पर अभिमत दिया जाना है।

प्रारूप 4 टिप्पणी दिणी का प्रारूप प्रत्येक कक्षा हेतु निर्धारित स्थान यथा पृष्ठ संख्या 54 106, 156, 236 एवं 256 पर लग्न है। शिक्षक द्वारा टर्म में शिक्षण कार्य के दौरान आई विशेष कठिनाइयों एवं उसके निराकरण के लिए किए गए विशेष प्रयास अथवा नवाचार जिससे शिक्षक को नए अनुभव प्राप्त हुए है इत्यादि विशेष बिन्दुओं का विवरण यहाँ लिखा जाना है।

सी.सी.ई. की अवधारणा में शिक्षक द्वारा शिक्षण कार्य के साथ ही मूल्यांकन आकलन का कार्य निहित होता है। शिक्षण आकलन योजना पाक्षिक होगी जिसे निरन्तर बनाई जानी है। योजना की अवधि दिनांक से 15 एवं 16 से 30 31 तक अंकित करते हुए उस पक्ष के कुल कार्यदिवसों का उल्लेख निर्धारित कॉलम में करें इस अवधि में आने वाले अवकाशों को कार्य दिवस में सम्मिलित नहीं करें। अवकाशों की अवधि में बच्चों को दिए गए कार्य प्रोजेक्ट कार्य गृह कार्य / अन्य गतिविधि का उल्लेख भी योजना में आवश्यक रूप से किया जाए गई व जून माह की कार्य योजना उस माह के निर्धारित कार्य दिवसों के अनुसार बनाई जाए। जैसे यदि एक से प्रारम्भ होता है तो प्रथम योजना एक मई से ग्रीष्मावकाश प्रारम्भ होने से एक दिवस पूर्व तक की होगी। जून माह में पुनः मारंभ से उस माह की अन्तिम तारीख तक की योजना बनाई जाए योगात्मक आकलन हेतु निर्धारित दिवस भी योजना में सम्मिलित किये जाएँ।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

Scroll to Top