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आज का प्रेरक प्रसंग, मीठी वाणी बोले, जिसको दुनिया तोले

आज का प्रेरक प्रसंग, मीठी वाणी बोले, जिसको दुनिया तोले - Shala Saral

आज का प्रेरक प्रसंग

बड़प्पन का मापदण्ड

एक राजा थे। वे वन-विहार के लिए निकले। रास्ते में उन्हें प्यास लगी। नजर दौड़ाई तो एक अंधे की झोपड़ी दिखी। उसमें जल भरा घड़ा दूर से ही दिख रहा था। राजा ने सिपाही को भेजा और एक लोटा जल माँग लाने के लिए कहा। सिपाही वहाँ पहुँचा और बोला- “ऐ अंधे, एक लोटा पानी दे दे।” अंधा अकड़ू था। उसने तुरन्त कहा- “चल-चल, तेरे जैसे सिपाहियों से मैं नहीं डरता। पानी तुझे नहीं दूँगा।” सिपाही निराश लौट पड़ा। इसके बाद सेनापति को पानी लाने के लिए भेजा गया। सेनापति ने समीप जाकर कहा- “अंधे! पैसा मिलेगा, पानी दे।”

अंधा फिर अकड़ पड़ा। उसने कहा, “पहले वाले का यह सरदार मालूम पड़ता है। फिर भी चुपड़ी बातें बना कर दबाव डालता है, जा-जा यहाँ से पानी नहीं मिलेगा।” सेनापति को भी खाली हाथ लौटता देखकर राजा स्वयं चल पड़े। समीप पहुँचकर वृद्ध जन को सर्वप्रथम नमस्कार किया और कहा- “प्यास से गला सूख रहा है। एक लोटा जल दे सकें तो बड़ी कृपा होगी।” अंधे ने सत्कारपूर्वक उन्हें पास बिठाया और कहा- “आप जैसे श्रेष्ठ जनों का राजा जैसा आदर है। जल तो क्या, मेरा शरीर भी स्वागत में हाजिर है। कोई और भी सेवा हो तो बताएं।”

राजा ने शीतल जल से अपनी प्यास बुझाई फिर नम्र वाणी में पूछा- “आपको तो दिखाई नहीं देता, फिर जल माँगने वालों को सिपाही, सरदार और राजा के रूप में कैसे पहचान पाए?” अंधे ने कहा- “वाणी के व्यवहार से हर व्यक्ति के वास्तविक स्तर का पता चल जाता है।”

शिक्षा:
सदैव मीठा वचन बोलना चाहिए, इससे सभी जगह आदर, प्यार, स्नेह प्राप्त होता है।