
राजिया रा दोहा
🍁🥀
राजिया रा दोहा*पिंड लछण पहचाण* *प्रीत हेत कीजे पछै |* *जगत कहे सो जाण* *रेखा पाहण राजिया ||*
किसी भी व्यक्ति से *प्रेम व घनिष्ठता* स्थापित करने से पहले उसके *व्यक्तित्व की* पूरी जानकारी कर लेनी चाहिय | हे राजिया ! यह लोक मान्यता *पत्थर पर खिंची लकीर* की भांति सही है | 🍁🥀
गीत नया रच पाऊँ
छंद सार ललित 16/12
पदांत दो गुरु😊 🙏

लगूँ हथेली में अति सुन्दर,
बनूँ हिना पिस जाऊँ।
तुम मस्तक पर तिलक करो नित,
चंदन बन घिस जाऊँ।।
महकुं तन उपवन में बनकर,
फूलों वाला गजरा।
और बनूँ मैं आज प्रियतमा,
आँखों वाला कजरा।।
हार बनूँ सिंगार बनूँ मैं,
बनूँ कान का झुमका।
पायल का घुँघरू बन जाऊँ
रोज लगाऊँ ठुमका।।
भोर भये लाली बन जाऊँ,
लब की मैं अनुराधा।
सांझ ढले बन के मनमोहन,
गाऊँ राधा राधा ।।
तुम मुझमे हो या मैं तुझमें
भेद नहीं कर पाऊँ।
सांसो की सरगम सुन करके
गीत नया रच पाऊँ।।
घनश्याम सिंह किनिया कृत
चारणवास हुडील नागोर
जाकर विधिपूर्वक ज्ञान प्राप्त करना ।
🚩llसाधक-संजीवनी ll🚩
🙏🏿🥰🥰🥰🥰🥰🥰🙏🏿
आगे चलकर भगवान्ने अड़तीसवें श्लोकमें कहा है कि यही तत्त्वज्ञान तुझे अपना कर्तव्य-कर्म करते-करते | (कर्मयोग सिद्ध होते ही) दूसरे किसी साधनके बिना स्वयं अपने-आपमें प्राप्त हो जायगा । उसके लिये किसी दूसरेके पास जानेकी जरूरत नहीं है ।
‘प्रणिपातेन’–ज्ञान-प्राप्तिके लिये गुरुके पास जाकर उन्हें साष्टांग दण्डवत्-प्रणाम करे । तात्पर्य यह कि गुरुके पास नीच पुरुषकी तरह रहे — ‘नीचवत् सेवेत सद्गुरुम्’, जिससे अपने शरीरसे गुरुका कभी निरादर, तिरस्कार न हो जाय । नम्रता, सरलता और जिज्ञासुभावसे उनके पास रहे और उनकी सेवा करे । अपने-आपको उनके समर्पित कर दे; उनके अधीन हो जाय । शरीर और वस्तुएँ – दोनों उनके अर्पण कर दे। साष्टांग दण्डवत्-प्रणामसे अपना शरीर और सेवासे अपनी वस्तुएँ उनके अर्पण कर दे। ‘सेवया’ – शरीर और वस्तुओंसे गुरुकी सेवा करे ।
जिससे वे प्रसन्न हों, वैसा काम करे । उनकी प्रसन्नता प्राप्त करनी हो तो अपने-आपको सर्वथा उनके अधीन कर दे । उनके मनके, संकेतके, आज्ञाके अनुकूल काम करे । यही वास्तविक सेवा है।
सन्त-महापुरुषकी सबसे बड़ी सेवा है उनके सिद्धान्तोंके अनुसार अपना जीवन बनाना । कारण कि उन्हें सिद्धान्त जितने प्रिय होते हैं, उतना अपना शरीर प्रिय नहीं होता । सिद्धान्तकी रक्षाके लिये वे अपने शरीरतकका सहर्ष त्याग कर देते हैं। इसलिये सच्चा सेवक उनके सिद्धान्तोंका दृढ़तापूर्वक पालन करता है ।
‘परिप्रश्नेन’–केवल परमात्मतत्त्वको जाननेके लिये, जिज्ञासुभावसे सरलता और विनम्रतापूर्वक गुरुसे प्रश्न करे । अपनी विद्वत्ता दिखानेके लिये अथवा उनकी परीक्षा करनेके लिये प्रश्न न करे ।
मैं कौन हूँ? संसार क्या है ? बन्धन क्या है ? मोक्ष क्या है ? परमात्मतत्त्वका अनुभव कैसे हो सकता है ? मेरे साधनमें क्या-क्या बाधाएँ हैं? उन बाधाओंको कैसे दूर किया जाय ? तत्त्व समझमें क्यों नहीं आ रहा है ? आदिआदि प्रश्न केवल अपने बोधके लिये (जैसे-जैसे जिज्ञासा हो, वैसे-वैसे) करे ।
‘ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः’ – ‘तत्त्वदर्शिनः’ पदका तात्पर्य यह है कि उस महापुरुषको परमात्मतत्त्वका अनुभव हो गया हो; और ‘ज्ञानिन: ‘ पदका तात्पर्य यह है कि उन्हें वेदों तथा शास्त्रोंका अच्छी तरह ज्ञान हो । ऐसे तत्त्वदर्शी और ज्ञानी महापुरुषके पास जाकर ही ज्ञान प्राप्त करना चाहिये ।
अन्त:करणकी शुद्धिके अनुसार ज्ञानके अधिकारी तीन प्रकारके होते हैं — उत्तम, मध्यम और कनिष्ठ । उत्तम अधिकारीको श्रवणमात्रसे तत्त्वज्ञान हो जाता है | मध्यम अधिकारीको श्रवण, मनन और निदिध्यासन करनेसे तत्त्वज्ञान होता है । कनिष्ठ अधिकारी तत्त्वको समझनेके लिये भिन्न-भिन्न प्रकारकी शंकाएँ किया करता है । उन शंकाओंका समाधान करनेके लिये वेदों और शास्त्रोंका ठीक-ठीक ज्ञान होना आवश्यक है; क्योंकि वहाँ केवल युक्तियोंसे तत्त्वको समझाया नहीं जा सकता । अतः यदि गुरु तत्त्वदर्शी हो, पर ज्ञानी न हो, तो वह शिष्यकी तरहतरहकी शंकाओंका समाधान नहीं कर सकेगा। यदि गुरु शास्त्रोंका ज्ञाता हो, पर तत्त्वदर्शी न हो तो उसकी बातें वैसी ठोस नहीं होंगी, जिससे श्रोताको ज्ञान हो जाय । वह बातें सुना सकता है, पुस्तकें पढ़ा सकता है, पर शिष्यको बोध नहीं करा सकता । इसलिये गुरुका तत्त्वदर्शी और ज्ञानी – दोनों ही होना बहुत जरूरी है ।
‘उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानम्’– महापुरुषको दण्डवत्प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और उनसे सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे वे तुझे तत्त्वज्ञानका उपदेश देंगे –
। समाप्य तत्पूर्वमुपात्तसाधनः समाश्रयेत् सद्गुरुमात्मलब्धये ॥ अध्यात्मरामायण, उत्तर० ५। ७) ‘सबसे पहले अपने-अपने वर्ण और आश्रमके लिये शास्त्रों में वर्णित क्रियाओंका यथावत् पालन करके चित्त शुद्ध हो जानेपर उन क्रियाओंका त्याग कर दे, फिर शम- दम आदि साधनोंसे सम्पन्न होकर आत्मज्ञानकी प्राप्तिके लिये सद्गुरुकी शरणमें जाय ।’
१ – आदौ स्ववर्णाश्रमवर्णिताः क्रियाः कृत्वा समासादितशुद्धमानसः
तद्विज्ञानार्थं स गुरुमेवाभिगच्छेत् समित्पाणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् । (मुण्डक० १ । २ । १२ ) ‘उस ज्ञानको प्राप्त करनेके लिये वह जिज्ञासु साधक हाथमें समिधा लिये हुए विनयपूर्वक वेदशास्त्रोंके ज्ञाता और तत्त्वज्ञानी गुरुके पास जाय ।’
२ – उत्तम अधिकारी वही है, जिसमें तत्त्वप्राप्तिकी लगन हो, जिसको तत्त्वप्राप्तिमें भविष्य अच्छा न लगे अर्थात् जो वर्तमानमें ही तत्काल तत्त्वप्राप्ति करना चाहता हो ।
३३९
श्लोक ३४
जय श्री राम
*छंद कुण्डलियां *

मन में किया विचार, संतजन कोई जाना।
करता कपट व्यवहार, कालनेमी पहचाना।।
पवन वेग से जा रहे, नभ में पवन कुमार।
राम राम धुन जब सुनी, मन में किया विचार।।
कहे कवि घनश्याम, दुष्ट को दबा लेग* से।
बोले जय श्री राम, उड़े फिर पवन वेग से।।
घनश्याम सिंह किनियां कृत
चारणवास हुडील
🔥 इस वक्त की सबसे बड़ी खबर 🔥
अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना : माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा के पाठ्यक्रम, ब्लूप्रिंट (नील-पत्र) एवं मॉडल पेपर्स के अंक-भार से संबंधित संशोधित परिपत्र अभी-अभी जारी किया ✅
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🍃🌾🌾 *02 JANUARY 2023* 🦋 *आज की प्रेरणा* 🦋
किसी भी व्यक्ति के लिए संतुष्ट मन सबसे बड़ा उपहार होता है, जिसका वो भरपूर आनंद ले सकता है!
आज से हम परमात्मा द्वारा प्राप्त हुई हर चीज़ के लिए उनका धन्यवाद करें और उन चीजों का आनंद लें…
💧 TODAY’S INSPIRATION 💧
A contented mind is the greatest blessing, a man can enjoy in the world!
TODAY ONWARDS LET’S Thank God for whatever He has given us and enjoy it wholeheartedly.
🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃💫🍃
दिनाँक:-02/01/2023, सोमवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष,
पौष (समाप्ति काल)
तिथि——– एकादशी 20:22:46 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र————भरणी 14:22:30
योग————-साध्य 30:51:13
करण———- वणिज 07:43:06
करण——- विष्टि भद्र 20:22:46
वार———————- सोमवार
माह———————— पौष
चन्द्र राशि———-मेष 20:50:46
चन्द्र राशि——————- वृषभ
सूर्य राशि——————— धनु
रितु———————— शिशिर
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर——————- शुभकृत
संवत्सर (उत्तर)——————— नल
विक्रम संवत—————- 2079
गुजराती संवत————– 2079
शक संवत—————– 1944
वृन्दावन
सूर्योदय————— 07:11:17
सूर्यास्त—————- 17:35:02
दिन काल————- 10:23:44
रात्री काल————- 13:36:29
चंद्रोदय————— 14:03:40
चंद्रास्त————— 27:57:15
लग्न—- धनु 17°12′ , 257°12′
सूर्य नक्षत्र————— पूर्वाषाढा
चन्द्र नक्षत्र—————— भरणी
नक्षत्र पाया——————स्वर्ण
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
ले—- भरणी 07:55:55
लो—- भरणी 14:22:30
अ—- कृत्तिका 20:50:46
ई—- कृत्तिका 27:20:38
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
सूर्य=धनु 17 : 29 पू oषाo , 2 धा
चन्द्र =मेष 22°23, भरणी , 3 ले
बुध =धनु 28 ° 34′ उ o षाo ‘ 1 भे
शुक्र=मकर 04°05, उ o षाo ‘ 3 जा
मंगल=वृषभ 14°30 ‘ रोहिणी’ 2 वा
गुरु=मीन 06°30 ‘ उ o भा o, 2 थ
शनि=मकर 28°43 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 16°00 भरणी , 2 ली
केतु=(व) तुला 16°00 विशाखा , 3 रो
🚩💮 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩
राहू काल 08:29 – 09:47 अशुभ
यम घंटा 11:05 – 12:23 अशुभ
गुली काल 13:41 – 14:59 अशुभ
अभिजित 12:02 – 12:44 शुभ
दूर मुहूर्त 12:44 – 13:26 अशुभ
दूर मुहूर्त 14:49 – 15:30 अशुभ
वर्ज्यम 27:21* – 29:05* अशुभ
💮चोघडिया, दिन
अमृत 07:11 – 08:29 शुभ
काल 08:29 – 09:47 अशुभ
शुभ 09:47 – 11:05 शुभ
रोग 11:05 – 12:23 अशुभ
उद्वेग 12:23 – 13:41 अशुभ
चर 13:41 – 14:59 शुभ
लाभ 14:59 – 16:17 शुभ
अमृत 16:17 – 17:35 शुभ
🚩चोघडिया, रात
चर 17:35 – 19:17 शुभ
रोग 19:17 – 20:59 अशुभ
काल 20:59 – 22:41 अशुभ
लाभ 22:41 – 24:23* शुभ
उद्वेग 24:23* – 26:05* अशुभ
शुभ 26:05* – 27:47* शुभ
अमृत 27:47* – 29:29* शुभ
चर 29:29* – 31:12* शुभ
💮होरा, दिन
चन्द्र 07:11 – 08:03
शनि 08:03 – 08:55
बृहस्पति 08:55 – 09:47
मंगल 09:47 – 10:39
सूर्य 10:39 – 11:31
शुक्र 11:31 – 12:23
बुध 12:23 – 13:15
चन्द्र 13:15 – 14:07
शनि 14:07 – 14:59
बृहस्पति 14:59 – 15:51
मंगल 15:51 – 16:43
सूर्य 16:43 – 17:35
🚩होरा, रात
शुक्र 17:35 – 18:43
बुध 18:43 – 19:51
चन्द्र 19:51 – 20:59
शनि 20:59 – 22:07
बृहस्पति 22:07 – 23:15
मंगल 23:15 – 24:23
सूर्य 24:23* – 25:31
शुक्र 25:31* – 26:39
बुध 26:39* – 27:47
चन्द्र 27:47* – 28:55
शनि 28:55* – 30:03
बृहस्पति 30:03* – 31:12
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
सूर्य=धनु 16 : 29 पू oषाo , 1 भू
चन्द्र =मेष 10°23, अश्वनी , 4 ला
बुध =धनु 29 ° 34′ उ o षाo ‘ 1 भे
शुक्र=धनु 03°05, उ o षाo ‘ 2 भो
मंगल=वृषभ 14°30 ‘ रोहिणी’ 2 वा
गुरु=मीन 06°30 ‘ उ o भा o, 2 थ
शनि=मकर 28°43 ‘ धनिष्ठा ‘ 2 गी
राहू=(व) मेष 16°05 भरणी , 2 ली
केतु=(व) तुला 16°05 विशाखा , 3 रो
🚩💮 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩
🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार (लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
💮दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
11 + 2 + 1 = 14 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
शनि ग्रह मुखहुति
💮 शिव वास एवं फल -:
11 + 11 + 5 = 27 ÷ 7 = 6 शेष
क्रीड़ायां = शोक ,दुःख कारक
🚩भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
07:47 से 20:23 तक
स्वर्ग लोक =शुभ कारक
💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮
- पुत्रदा एकादशी व्रत (सर्वेषां)
*वैकुंठ मेला रंगजी वृन्दावन
💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮
कवयः किं न पश्यन्ति कि न कुर्वन्ति योषितः ।
मद्यपाः किं न जल्पन्ति किंन खादन्ति वायसाः ।।
।। चा o नी o।।
वह क्या है जो कवी कल्पना में नहीं आ सकता. वह कौनसी बात है जिसे करने में औरत सक्षम नहीं है. ऐसी कौनसी बकवास है जो दारू पिया हुआ आदमी नहीं करता. ऐसा क्या है जो कौवा नहीं खाता.
🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩
गीता -: विभूति योग अo-10
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः।,
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥,
हे अर्जुन! उनके ऊपर अनुग्रह करने के लिए उनके अंतःकरण में स्थित हुआ मैं स्वयं ही उनके अज्ञानजनित अंधकार को प्रकाशमय तत्त्वज्ञानरूप दीपक के द्वारा नष्ट कर देता हूँ॥,11॥,
💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮
देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।
🐏मेष
यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। रोजगार मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ संभव है। जोखिम न लें। धर्म के कार्यों में रुचि आपके मनोबल को ऊंचा करेगी। मिलनसारिता व धैर्यवान प्रवृत्ति जीवन में आनंद का संचार करेगी। कई दिनों से रुका पैसा मिल सकेगा।
🐂वृष
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। जोखिम न उठाएं। आज का दिन आपके लिए शुभ रहने की संभावना है। स्थायी संपत्ति में वृद्धि होगी। रोजगार के अवसर मिलेंगे। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
👫मिथुन
मेहनत का फल मिलेगा। योजना फलीभूत होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कर्ज से दूर रहना चाहिए। खर्च में कमी होगी। कानूनी विवादों का निपटारा आपके पक्ष में होने की संभावना है। प्रतिष्ठितजनों से मेल-जोल बढ़ेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
🦀कर्क
विवाद से क्लेश होगा। फालतू खर्च होगा। पुराना रोग परेशान कर सकता है। जोखिम न लें। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता प्राप्ति के योग हैं। सावधानी व सतर्कता से व्यापारिक अनुबंध करें। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा।
🐅सिंह
मेहनत का फल कम मिलेगा। कार्य की प्रशंसा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता रहेगी। संतान की शिक्षा की चिंता समाप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। महत्व के कार्य को समय पर करें। व्यावसायिक श्रेष्ठता का लाभ मिलेगा।
🙎♀️कन्या
संपत्ति के कार्य लाभ देंगे। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें। धैर्य एवं शांति से वाद-विवादों से निपट सकेंगे। दुस्साहस न करें। नए विचार, योजना पर चर्चा होगी। स्वयं की प्रतिष्ठा व सम्मान के अनुरूप कार्य हो सकेंगे।
⚖️तुला
कुसंगति से हानि होगी। वाहन मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें, जोखिम न लें। परेशानियों का मुकाबला करके भी लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे। व्यापारिक लाभ होगा। संतान के प्रति झुकाव बढ़ेगा। शिक्षा व ज्ञान में वृद्धि होगी।
🦂वृश्चिक
किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। लाभ होगा। धन संचय की बात बनेगी। परिवार के कार्यों पर ध्यान देना जरूरी है। रुका कार्य होने से प्रसन्नाता होगी। आर्थिक सलाह उपयोगी रहेगी। कर्ज की चिंता कम होगी।
🏹धनु
चोट व रोग से बचें। कानूनी अड़चन दूर होगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। प्रसन्नता रहेगी। क्रय-विक्रय के कार्यों में लाभ होगा। योजनाएं बनेंगी। उच्च और बौद्धिक वर्ग में विशेष सम्मान प्राप्त होगा। भाइयों से अनबन हो सकती है। अपनी वस्तुएं संभालकर रखें।
🐊मकर
राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। जायदाद संबंधी समस्या सुलझने के आसार बनेंगे। अनुकूल समाचार मिलेंगे तथा दिन आनंदपूर्वक व्यतीत होगा। नए संबंध लाभदायी सिद्ध होंगे।
🍯कुंभ
व्यवसाय ठीक चलेगा। पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। व्यय होगा। प्रसन्नता रहेगी। व्यापार में नए अनुबंध लाभकारी रहेंगे। परिश्रम का अनुकूल फल मिलेगा। परिजनों के स्वास्थ्य और सुविधाओं की ओर ध्यान दें।
🐟मीन
व्यापार-व्यवसाय संतोषप्रद रहेगा। आपसी संबंधों को महत्व दें। अल्प परिश्रम से ही लाभ होने की संभावना है। खर्चों में कमी करने का प्रयास करें। अति व्यस्तता रहेगी। बुरी खबर मिल सकती है। दौड़धूप अधिक होगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। थकान रहेगी।
🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
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