राजस्थान शिक्षा विभाग समाचार 2023

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एक कहानी | शर्तों वाली चिट्ठी

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शर्तों वाली चिट्ठी

रमीला की बहू विवाह के दूसरे दिन सुबह आठ बजे जैसे ही सो कर अपने कमरे से बाहर निकली तब ड्राइंगरूम में बैठी सास ने कड़क कर कहा- “बहू ये देर से उठने की आदत यहां नहीं चलेगी।”

बहू ये सुनते ही वापस अपने कमरे में गई और एक डायरी और एक छोटा सा चमड़े का बैग ले कर वापस आयी और सास के बगल में बैठकर चिट्ठी खोलकर पढ़ना शुरू किया – मारुति अर्टिगा – सत्रह लाख, बयालीस इंच स्मार्ट टीवी – बावन हजार, फ्रिज – तेरह हजार, वाशिंग मशीन – बारह हजार, सोफा, डाइनिंग टेबल, बेड – एक लाख लाख, मिक्सी, ओवन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण – डेढ लाख, नगदी- पंद्रह लाख आदि !

चिट्ठी में लिखा पढ़ते हुए बहू ने कहा -” मम्मी जी, ये वहीं चिट्ठी है जो शादी से पहले आपने मेरे पिता के पास भिजवाई गई थी । “

“चिट्ठी में लिखी सारी चीजें मेरे पापा ने मेरे साथ भिजवाई है। सभी चीजों का आप मिलान कर के देख लीजिये । आपको याद होगा कि आपने मेरे बारे में इस चिट्ठी में कोई ऐसी मांग नही की है कि. – बहू पढ़ी-लिखी, गुणकारी, संस्कारी और कामकाजी हो।”

“मां जी आपने अपने बेटे की कीमत लगाई और मेरे पिता ने आपके बेटे को मेरे लिये खरीद लिया । और हां मम्मी विदाई के वक्त मेरे पिता ने ये चिट्ठी मुझे देते हुए कहा- बेटी तू जब तक मेरे आंगन में रही सुरक्षित रही। आगे तुझे अपनी हिफाज़त खुद करनी है।

बहू का जवाब सुनकर रमीला आवाक रह गई !

हरीश सुवासिया, आर. ई. एस. देवली कला (पाली )

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