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शिवानी टेलर |नारी सशक्तिकरण की एक गूँजती आवाज

आज पूरा संसार एक तरफ नारी को माता के रूप में महिमामण्डित करके उसका अभिवादन करता है वहीं दूसरी तरफ अखबारों में नारी उत्पीड़न सम्बंधित समाचार हमारी आत्मा को झकझोर देते है। शिवानी टेलर की कलम नारी सशक्तिकरण की एक पुरजोर आवाज है। आइये, उनकी एक कविता से प्रेरणा प्राप्त करते है।

शिवानी टेलर | कविता- खून खोलता है मेरा

खून खोलता है मेरा
जब भी स्त्री बनती है
अखबारों की सुर्खियां।


कभी दहेज के नाम पे
कभी बलात्कार के नाम पे
जब सरेआम छींटाकशी की जाती है उन मासूम बच्चियों पे,
कभी घर में जब उनको
प्रताड़ित किया जाता है।
हर पल जब उनसे,
उनका अधिकार छीना जाता है।
खून खोलता है मेरा।

जब इंसान वहसी बन जाता है
चेहरे बदल बदल कर,
हर मोड़ पर जब स्त्री को
अबला होने का अहसास
दिलाया जाता है।
इंसान का जानवर जब ,
चारदीवारी में बाहर आता है।
खून खोलता है मेरा।

जब स्त्री के सपनों को,
कुचला जाता है
कच्ची उम्र में जब उन्हें
मसल दिया जाता है ।
खून खोलता है मेरा
जब स्त्री , स्त्री की दुश्मन बन जाती है
घर के अंदर ही
बंदिशें लग जाती है
और उनके सुनहरे सपनों को
बेड़ियां पहना दी जाती है
खून खोलता है मेरा

जब उन्हें चुप करा दिया जाता है
और कभी जब वह
ख़ुद ही खामोशी की चादर,
ओढ़ लेती है
जब वह अपने अधिकारों के लिए
लड़ नहीं पाती,
खून खोलता है मेरा

लेखिका परिचय

शिवानी टेलर, आर्या
कोटा ( राजस्थान)