प्रश्नोतरी | प्रधानाचार्य के आदेश की कार्मिक द्वारा अवहेलना पर कार्यवाही

प्रधानाचार्य के आदेश की कार्मिक द्वारा अवहेलना पर कार्यवाही की जा सकती है। नियम उपनियम के तहत विभाग के विशेषज्ञ बन्धुओं द्वारा वर्णित समाधान को सभी के उपयोग हेतु संकलित करके रखा जा रहा है।

प्रश्न : कोई कार्मिक प्रधानाचार्य के विधि सम्मत आदेशों की पालना यथा चार्ज / प्रभार लेने से मना करना या अपने विभागीय दायित्वों की पालना नहीं करें तो ऐसी स्थिति में संस्था प्रधान को क्या करना चाहिए?

उत्तर : किसी भी संस्था में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ कर्मचारियों को तो समझाना मात्र ही आवश्यक होता है जबकि कुछ परिस्थितियों में अनुशासनिक प्रक्रिया को अपनाया जाना आवश्यक है।

ऐसे कई कार्य एवं कारण हैं जिन पर किसी राज्य कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है।

🌟 अपने कार्य के प्रति उदासीनता व लापरवाही बरतना, अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार कार्य नहीं करना, अपने से उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा करना , सेवा नियमों या कानून कायदों की अवहेलना करना ।

🌟 कर्मचारी द्वारा संस्था प्रधान के विधि सम्मत आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम ,1971 के बिंदु संख्या 3 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी हर समय पूर्ण निष्ठा से कार्य करेगा तथा कर्तव्य निष्ठा व कार्यालय की गरिमा बनाए रखेगा। साथ ही अपने कार्यालय के कर्तव्यों के पालन में उच्च अधिकारी के विधि सम्मत निर्णय के विरुद्ध कोई कार्य नहीं करेगा।

🌟 उक्त कृत्य राजस्थान सिविल सेवा (आचरण नियम ) 1971 के नियम 4 अनुचित एवं अशोभनीय आचरण के उप बिंदु संख्या 5 का भी उल्लंघन है।

आचरण संहिता में यह प्रावधान है कि यदि कोई कार्मिक संस्था प्रमुख के विधि सम्मत आदेशों या वरिष्ठ अधिकारी की अवज्ञा करता है तो उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही की जा सकती है।

🌟 सर्वप्रथम कार्मिक को आदेशों की अवहेलना करने पर कारण बताओ नोटिस देना चाहिए। चार्ज या प्रभार नहीं लेना राजकार्य में बाधा का प्रतीक है। कुछ कार्मिक नादानी में या जानबूझ कर ऐसा आचरण या व्यवहार करते हैं। चार्ज /प्रभार से कार्मिक किसी भी स्थिति में नहीं बच सकता। क्योंकि ऐसा करने पर अन्य कार्मिक भी उच्चाधिकारी के आदेशों का पालन करना उचित नहीं समझेंगे।

🌟 अतः ऐसे मामले पर राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), 1958 तथा राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण नियम), 1971 के तहत कार्मिक को नोटिस दिया जाए। यदि नोटिस नहीं लेता है तो गवाहों के हस्ताक्षर कराएं। पुन: नोटिस दें। जवाब नहीं देने या असंतोषजनक जवाब देने पर कार्मिक के विरुद्ध सक्षम अधिकारी को विभागीय कार्यवाही हेतु अनुशंसा करें।

🌟सक्षम अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों के सम्बन्ध में जांच कराई जा सकती है। यदि कार्मिक दोषी पाया जाता है तो राजस्थान सिविल सेवा (सीसीए रूल्स) 1958 के तहत संबंधित के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

🌟 कार्मिक को अपने आचरण/व्यवहार में सुधार के लिए चेतावनी भी दी जानी चाहिए कि या तो आप चार्ज /प्रभार ले अन्यथा आप के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा कर दी जाएगी

🌟 यदि फिर भी कार्मिक के आचरण/व्यवहार में वांछित सुधार नहीं होता है तो शिविरा दिनांक 9 अगस्त ,1999 में दिए गए निर्देश अनुसार कार्मिक को नियोक्ता कार्यालय हेतु कार्यमुक्त कर देना चाहिए। ताकि उस कार्मिक की वजह से संस्थान हित पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़े।

🌟इसके अलावा वार्षिक कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट में भी कार्मिक के आचरण और व्यवहार के बारे में टिप्पणी दर्ज़ करें। APAR में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज होने पर भविष्य में देय एसीपी या पदोन्नति भी प्रभावित हो सकती है।

श्री लीलाराम, प्रधानाचार्य, राउमावि, मुबारिकपुर (रामगढ़) जिला अलवर, मोबाइल