सोशल मीडिया वाइरल | एक अध्यापक द्वारा वर्तमान युवा पीढ़ी पर सामयिक आलेख | Current article on the present young generation by a teacher

सोशल मीडिया पर एक आलेख वायरल हो रहा है। इस आलेख में एक अध्यापक की वर्तमान युवा पीढ़ी पर सामयिक टिप्पणी की गई है। आज की दुनिया जिस प्रकार टेक्नोलॉजी के जंजाल में उलझ रही है तथा इसका असर जिस प्रकार अबोध बच्चों की मानसिकता पर पड़ रहा है, यह एक विशेष विषय है। इस विषय पर यह आलेख हमको सजग करता है। आइये, इस आलेख को पढ़े।

An article is going viral on social media. In this article a contemporary commentary has been made on the present young generation of a teacher. The way today’s world is getting entangled in the web of technology and the way it is affecting the mentality of innocent children, this is a special topic. This article alerts us on this subject. Come, read this article.

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बच्चों की मानसिकता पर एक शिक्षक का मर्मस्पर्शी आलेख | A touching article by a teacher on the mentality of children

टेक्नोलॉजी व शिक्षा अलग मुद्दे है। Technology and education are separate issues.

अभिभावक मुझे बताते हैं कि मेरा बच्चा बहुत खोया-खोया सा रहता है। यह सत्य है कि बच्चे आजकल अजीब सी दुनिया में रहते हैं । यहां पर टैक्नोलोजी का बहुत बड़ा रोल है। यह ठीक है कि टैक्नोलोजी हमारी जिंदगी को आसान बनाती है लेकिन बच्चों की जिंदगी में इस टैक्नोलोजी का अलग रूप है। उनकी जिंदगी को यह बहुत उलझा देती है, बहुत मुश्किल सा कर देती है क्योंकि टैक्नोलोजी और पढाई में बहुत अंतर है।

Many parents tell me that my child is very lost. It is true that children nowadays live in a strange world. Technology has a big role here. It is true that technology makes our life easy but this technology has a different form in the life of children. It complicates their life a lot, making it very difficult because there is a lot of difference between technology and education.

टेक्नोलॉजी का बढ़ता प्रकोप | growing outbreak of technology

टैक्नोलोजी की वजह से बच्चे बहुत ज्यादा इंटरनेट, आनलाइन खेल आदि का ज्यादा प्रयोग करते हैं क्योंकि यह उन्हें पढ़ाई से ज्यादा आसान लगता है और इसमें ज्यादा आनंद आता है। आपका मोबाईल, कम्प्यूटर पर खेल खेलना बहुत आसान है बस एक बटन दबाया और आपकी मनचाही गेम आपके सामने प्रकट हो गई। यह आपकी वास्तविक जिंदगी की तुलना में बहुत आसान होती है। जैसे ही आप अपनी वास्तविक जिंदगी में आते हैं तो वह आज भी वैसी ही है जैसे आज से 20 वर्ष पहले थी। अगर आप कोई क्लिप पढेंगे तो पहले उसमें सब कुछ आपको पढना होगा और बहुत सारे सवाल करने होंगें तब जाकर आपको वह विषय समझ आएगा।
बच्चों के लिए टी वी पर एक कार्टून आता है डोरेमोन। जिसमें एक बच्चा है उसके पास एक रोबोट है जिसका नाम डोरेमोन है। यह बच्चा बहुत आलसी और कामचोर होता है वह अपना सारा काम यहाँ तक कि होमवर्क भी रोबोट से कराता है। यहाँे बच्चा उस कार्टून का हीरो है क्योंकि उसे जब भी कोई काम करना होता है वह खुद न करके उस रोबोट की मदद लेता है।

Due to technology, children use a lot of internet, online games etc. because they find it easier than studying and enjoy more in it. It is very easy to play the game on your mobile or computer, just press a button and your favorite game is revealed in front of you. It is much easier than in your real life. As soon as you come to your real life, it is still the same as it was 20 years ago. If you read a clip, then first you have to read everything in it and ask a lot of questions, then you will understand that topic.
There is a cartoon on TV for children, Doraemon. The one who has a child has a robot named Doraemon. This kid is very lazy and doodle, he gets all his work even homework done by robot. Here the child is the hero of that cartoon because whenever he has to do some work, he takes the help of that robot instead of himself.

आभासी दुनिया में खो रही है आने वाली पीढ़ी | The coming generation is getting lost in the virtual world


ऐसे ही बच्चे धीरे-धीरे एक ख्याली दुनिया में जीना शुरू कर देते हैं। वो यह सोचते है कि काश! मेरे पास भी कोई ऐसा जादू हो, ऐसा कोई रोबोट हो, कोई ऐसी एप्लीकेशन या टूल हो जिसे मैं जो कहूँ मेरा वह कार्य कर दे और वह इस ख्याल में सोचना और जीना शूरू कर देता है कि उसके पास भी एक ऐसा रोबोट है। जिसमें वह खोया-खोया रहता है तो बच्चे जितना ज्यादा अपना समय टैक्नोलोजी, मोबाइल, टीवी के साथ बितायेंगे वह उतना ही सपनों की दुनिया में रहंेगे जिससे उनका बौद्धिक और वैचारिक स्तर गिरना शुरू हो जाएगा।
उसकी मेहनत करने की आदत खत्म हो जाती है। वह अगर डिजिटल वस्तुओं का ज्यादा उपयोग करेंगे तो इसका बहुत ज्यादा नुकसान होगा।

Such children gradually start living in a conscious world. He thinks that I wish! I too have such magic, some such robot, some such application or tool, which can do whatever I tell me to do and he starts thinking and living in the thought that he too has such a robot. In which he is lost and lost, then the more children spend their time with technology, mobile, TV, the more they will live in a dream world, due to which their intellectual and ideological level will start falling.
He gets used to working hard. If he uses more digital goods, then it will cause a lot of damage.

15 साल तक के बच्चों को डिजिटल दुनिया से दूर रखें | Keep children up to 15 years away from the digital world


इसलिए यह बहुत जरूरी है कि अगर आप अपने बच्चे का भला चाहते हैं तो करीब 15 साल तक इस डिजिटल दुनिया से उसे दूर रखें। चाहे वह लड़का हो या लड़की आप 12वीं कक्षा तक मोबाइल उनके हाथ में मत दीजिए। आज के समय में मुश्किल है पर आप इसे कर सकते हैं। इसके लिए आप बच्चे को साधारण मोबाइल दें। यदि एनड्रोयड मोबाइल दिया है तो बच्चे को फेसुबक और वाट्सअप जैसे एप्लिकेशन डाउनलोड न करने दें। स्वयं भी इनका बहुतायत प्रयोग करने से बचें विशेषकर बच्चों के सामने।


अगर आप अपने बच्चे की जिंदगी सुरक्षित रखना चाहते हैं तो लड़कों को 12वीं कक्षा तक बाईक मत चलाने दीजिए।
तभी आपके बच्चे बहुत तरक्की करेंगे और सुरक्षित भी रहेंगें और वास्तविक दुनिया में उन्हें मेहनत करने की आदत भी बनी रहेगी।

That’s why it is very important that if you want the best of your child, then keep him away from this digital world for about 15 years. Whether it is a boy or a girl, do not give a mobile in their hands till class 12th. It’s difficult these days but you can do it. For this, give the child a simple mobile phone. Do not allow the child to download applications like Facebook and WhatsApp if Android mobile is provided. Avoid using them too much on your own, especially in front of children.

If you want to keep your child’s life safe, don’t let boys ride bikes till class 12th.
Only then your children will grow and be safe and they will also be in the habit of working hard in the real world.

expectations vs reality