GK | राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु सामान्य ज्ञान दिनाँक 24 अगस्त 2022

General Knowledge for Rajasthan’s Competitive Exams

राजस्थान राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नियमित तैयारी हेतु हम अपने पाठकों के लिए नवीनतम सामान्य ज्ञान ( General Knowledge ) प्रस्तुत कर रहे है। हम आपको नवीनतम सामान्य ज्ञान के नोट्स (Notes) दैनिक रूप से उपलब्ध करवाने का निरन्तर प्रयास करेंगे।

राजस्थान साहित्य अकादमी

राजस्थान साहित्य अकादमी की स्थापना 28 जनवरी, 1958 ई. को राज्य सरकार द्वारा एक शासकीय इकाई के रूप में की गई और 8 नवम्बर, 1962 को इसे स्वायत्तता प्रदान की गई, तदुपरान्त यह संस्थान अपने संविधान के अनुसार राजस्थान में साहित्य की प्रोन्नति तथा साहित्यिक संचेतना के प्रचार-प्रसार के लिए सतत् सक्रिय है।

राजस्थान साहित्य अकादमी का निर्माण साहित्य जगत हेतु एक सुखद घटना है और राजस्थान के सांस्कृतिक और साहित्यिक पुनर्निर्माण एवं विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी

राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत द्वारा बजट घोषणा वर्ष 2019-2020 में कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी के गठन को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मुख्य सचिव श्री राजीव स्वरूप ने बताया कि कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश में बाल-साहित्य संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और बाल-साहित्य रचनाकारों के सहयोग के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी का गठन करने की मुख्यमंत्री ने बजट वर्ष 2019-2020 में घोषणा की थी।

राजस्थानी भाषा, साहित्य व संस्कृति अकादमी

वरिष्ठ साहित्यकार शिवराज छंगाणी ने कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत मंगलवार को राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया।

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सूर्यमल मिश्रण शिखर पुरस्कार से पुरस्कृत शिवराज छंगाणी पूर्व में अकादमी के उपाध्यक्ष व कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी राजस्थानी – हिन्दी में अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत अकादमी के साधारण सभा के सदस्यों के रूप में साहित्यकार राजेन्द्र जोशी, आईदान सिंह भाटी, डा. भरत ओला, घनश्याम नाथ कच्छावा, डा. मीनाक्षी बोराणा, सुखदेव राव, दिनेश पांचाल, अंबीका दत्त, वीना जोशी, डा. शारदा कृष्ण का मनोनयन किया गया है।

राजस्थान संस्कृत अकादमी

राजस्थान संस्कृत अकादमी की स्थांपना वर्ष 1980 में संस्कृत दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार के द्वारा की गई | संस्कृत अकादमी की स्थापना के मूल उद्देश्यों में संस्कृत भाषा एवं उसके साहित्य का संरक्षण, विकास एवं प्रोत्साहन के लिए शोध संस्थान की स्थापना; संस्कृत वाड्मय में अन्तर्विष्ट ज्ञान का प्रकाशन एवं अन्य भाषाओं में अनुवाद तथा उसका प्रचार-प्रसार; वैदिक परम्परागत उच्चारण एवं प्रक्रियाओं का संरक्षण इत्यादि संस्कृत के उन्‍नयन से संबंधित अनेक कार्य सम्मिलित हैं |

अकादमी सम्पूर्ण प्रदेश में विभिन्‍न महत्त्वपूर्ण सामयिक विषयों पर विचार गोष्ठियाँ, कार्यशालाएं, विभिन्‍न जयन्तियां, संस्कृत कवि सम्मेलन, रचनाधर्मिता शिविर, ज्योतिष-पौरोहित्य-संस्कृत सम्भाषण शिविर, मंत्रोच्चारण प्रतियोगिता, सिद्धान्त एवं प्रयोग आधारित कार्यशालाओं का आयोजन करती है| संस्कृत के वरिष्ठ विद्वानों के मार्गदर्शन एवं सान्निध्य में युगानुकूल शोध लेखन को प्रोत्साहन एवं उसका प्रकाशन करती है।

राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी

राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी एक स्वशासी संस्था है यह राजस्थान राज्य में ब्रज साहित्य के प्रचार प्रसार और विकास के लिए कार्य करती है. यह अब तक राजस्थान में ब्रज भाषा में लिखे गये बहुमूल्य पांडुलिपियों की खोज और उनके प्रकाशन का कार्य करती है. यह राजस्थान के ब्रजभाषा के वरिष्ठ कवियों, लेखकों , नाटककारों, उपन्यासकारो, कहानीकारों, समालोचकों आदि की रचनाओं को प्रकाशित करवाने और उन्हें प्रोत्साहित करवाने का काम करती है. ब्रज भाषा के साहित्कारों लेखकों को वित्तीय सहयोग , शोधवृत्तियां आदि प्रदान करती है.

यह अकादमी ब्रज भाषा का साहित्यकार सम्मेलन, विचार संगोष्ठियाँ, परिसंवाद, सृजन तीर्थ, रचनापाठ, रचना शिविर, प्रदर्शनियां, अन्त्प्रार्देशिक साहित्यकार बंधुत्व यात्राएं, भाषण माला, तथा साहित्य के प्रचार प्रसार की अन्य योजनाओं आदि की व्यवस्था करना तथा तदनिम्मित आर्थिक सहयोग देने का कार्य करती है.

राजस्थान संगीत नाटक अकादमी

राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद पर जोधपुर की संस्कृतिधर्मी श्रीमती बिनाका जेश मालू को नियुक्त किया है।

कला संस्कृति के क्षेत्र में पिछले 35 वर्षों से सक्रिय बिनाका प्रदेश की ख्यातनाम उदघोषिका व मंचीय कलाओं से जुड़ी सृजनधर्मी कला नेत्री है। नाटकों में अभिनय साथ संगीत, नृत्य व लोक कलाओं के साथ बिनाका डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माण से भी जुड़ी हुई है।

अकादमी सदस्य के रूप में जयपुर की कत्थक नृत्यांगना अनिता ऑर्डिया, बाड़मेर के लोक गायक पद्मश्री अनवर खान मांगणियार, जोधपुर के नाट्य निर्देशक रमेश भाटी व सब्बीर हुसैन, बीकानेर के विपिन पुरोहित,अभिषेक डेनवाल, जयपुर के गगन मिश्रा अलवर के कांति भाई, अजमेर के योबी जॉर्ज सहित ग़ज़ल गायक उदयपुर के प्रेम भंडारी को सदस्य बनाया गया है।

राजस्थान ऊर्दू अकादमी

राजस्थान उर्दू अकादमी की स्थापना फरवरी, 1979 में उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए की गई थी। अकादमी अपनी योजनाओं जैसे उर्दू छात्रों को छात्रवृत्ति देने के माध्यम से उर्दू जानने वाली जनता के लाभ के लिए काम करती है। पुराने और जरूरतमंद उर्दू कवियों, लेखकों, पत्रकारों और सुलेखकों को वित्तीय सहायता देना; उर्दू भाषा और उसके साहित्य को बढ़ावा देने से संबंधित समसामयिक विषयों पर संगोष्ठी और संगोष्ठी आयोजित करना।

राजस्थान ललित कला अकादमी

1957 में राजस्थान की राज्य सरकार द्वारा स्थापित, ललित कला अकादमी का उद्देश्य राज्य की क्षेत्रीय कला और कलाकारों को प्रेरित करना और उनका समर्थन करना है। अकादमी अपनी दृष्टि की दिशा में कई अलग-अलग कार्यक्रमों के साथ-साथ समय पर अभियान चला रही है और सफलतापूर्वक चला रही है। ।की एक संख्याआरंभिक रूप से स्थापित कार्यक्रम अभी भी क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें वार्षिक कला प्रदर्शनी, फैलोशिप कार्यक्रम, व्यक्तिगत / समूह कला प्रदर्शनी, वित्तीय सहायता प्रदान करने वाले कलाकार, कला संस्थान, कला पुस्तकालय, कला प्रकाशन आदि शामिल हैं। राज्य कला प्रदर्शनी, राज्य कला संगोष्ठी, राज्य कला शिविर, स्मृति व्याखनमलय, फिल्म और कला प्रलेखन, वार्षिक कला प्रदर्शनी (वार्षिक कला मेला), छात्र कला प्रदर्शनी (छत्र कला मेला) आदि जैसे कई नए कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। राज्य कला को बढ़ावा देने के लिए साबित करेंऔर संस्कृति।

राजस्थान किसान आयोग

राजस्थान सरकार द्वारा राज्य में कृषि, पशुपालन एवं मतस्य क्षेत्र के समग्र विकास एवं किसानों, पशुपालकों, कृषि श्रमिकों की समस्याओं की जानकारी प्राप्त करने, कृषि उत्पादकता एवं निर्यात में वृद्वि, कृषि हेतु ऋण की व्यवस्था, ग्रामीण समुदाय के आर्थिक व सामाजिक मुद्दों पर नीतिगत निर्णय, तकनीकी के विकास, आगम-निगम मूल्यों के निर्धारण, फार्म व गैर-फार्म प्रक्षेत्र की आय में वृद्धि, कृषि उत्पादों की गुणवत्ता एवं उनके राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्र्रीय स्तर पर प्रमोशन इत्यादि विषयों की जाँच एवं समीक्षा कर राज्य सरकार को उचित सुझाव प्रदान करने एवं कृषक संगठनों/यूनियनों से वार्ता कर उनकी मांगों से सरकार को अवगत करवाने के लिये राजस्थान किसान आयोग का गठन किया गया।

श्रम सलाहकार मंडल

श्रम सलाहकार मंडल में राजस्थान श्रम कल्याण बोर्ड के वाइस चेयरमैन, राजस्थान इंटक प्रदेशाध्यक्ष और पीसीसी के पूर्व महासचिव जगदीशराज श्रीमाली को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। 

पिनाका एमके-वन

पिनाका मिसाइल के अपग्रेड वर्जन का नाम पिनाका एमके-वन है। यह मिसाइल 45 किमी तक टारगेट को सफलतापूर्वक हिट करने में सक्षम है। इस पर 100 किलो तक एमूनेशन लोड हो सकता है। इससे इजाफा होगा। यह 280 किलो वजनी और 15 फुट लंबी है। इस मिसाइल की खासियत है कि निशाना दागने के बाद भी अपनी दिशा को बदल सकती है और टारगेट को सटीक तरीके से हिट कर सकती है। मार्क-वन पिनाका का एडवांस वर्जन है। इस मिसाइल से किसी गाड़ी, बंकर, बेड़े, तोप या किसी भी टारगेट पर सटीक निशाना लगाया जा सकता है।

दूरिया दुगिना

दारिया दुगिना की हत्या। यह लड़की रूसी नेता व्लादिमीर पुतिन स्वीक के मुख्य रणनीतिकार अलेक्जेंडर दुगिना की बेटी थी। जहां तक दारिया दुगिना की हत्या का सवाल है, रूसी अधिकारियों का कहना है कि एक यूक्रेनी औरत, जिसका नाम नतालिया वोक है, उसने दारिया की हत्या की है। वह भेजी तो गई थी अलेक्जेंडर दुगिना की हत्या के लिए लेकिन दारिया ही उसके हाथ लग गई।

रूसी जांच एजेंसी को शक है कि हत्या करने के बाद नतालिया तुरंत भागकर एस्टोनिया में छिप गई है। एस्टोनिया एक पूर्व सोवियत राष्ट है और आजकल रूस से उसके संबंध सामान्य नहीं हैं।

आजमोव

उजबेकिस्तान का यह नागरिक किसी बड़े भारतीय नेता की हत्या के लिए तैयार किया गया था। यह ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रॉविंस’ का कारिंदा है। यह मुसलमान युवक किसी पूर्व सोवियत राज्य से आकर तुर्किए में प्रशिक्षित हुआ है। इसे जिम्मेदारी दी गई थी कि वह भारत जाकर किसी नेता को अ पर आत्मघाती हमला करे।

30 वर्षीय उजबेक आजमोव रूस समिि पहुंच कर भारत आने की फिराक में था। इसके पीछे काम कर रही ‘इस्लामिक स्टेट’ चाहती थी कि वह ‘अल-कायदा’ के उग्रवाद से भी आगे निकल जाए। जब रूसी गुप्तचर एजेंसी की 3 ने आज़मोव को गिरफ्तार करके कड़ी पूछताछ की तो उसने बहुत से रहस्यों को उगल दिया।

रणबीर सिंह

जाने-माने रंगकर्मी और इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह का मंगलवार को 93 साल की उम्र में निधन 23 अगस्त 2022 को हो गया। चार दिन पहले ही उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी । वे निर्देशक, नाट्य और फिल्म अभिनेता, लेखकर और इतिहासकार भी थे। रणबीर सिंह के निधन के बाद देशभर के नाट्य और सिने जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। बता दें कि रणबीर सिंह ने थिएटर की दुनिया में अनेक नाटकों का निर्देशन, विदेशी नाटकों का भारतीय रूपांतरण भी किया था ।

बछ बारस

भारत में गोवंश का आध्यात्मिक और समाज में बड़ी भूमिका है। गाय को भगवान का दर्जा दिया हुआ, जिसको लेकर बछ बारस के दिन गाय के बछड़े की पूजा अर्चना की जाती है। आज के दिन मान्यता है कि किसी भी प्रकार से चाकू से कटा हुआ और हरी सब्जी का भोजन नहीं किया जाता है। इस पालना के साथ में एक दिन पूर्व से ही महिलाएं गाय के बछड़े की पूजा करने के लिए तैयार रहती हैं। गली मोहल्लों के साथ ही गौशालाओं तथा मंदिरों में सुबह से ही महिलाओं ने पूजा अर्चना की। परिवार की खुशहाली और अपने बच्चे की लंबी उम्र की कामना की। किसान बछड़े के पूजा करने के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण और गौमाता से उनका आशीर्वाद लेते हैं।

आज के इस पावन दिन पर मूंग, मक्की, बाजरा से विशेष प्रकार के व्यंजनों का पकवान बनाया जाता है और परिवार के साथ में बैठकर भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाकर सभी में भगवान का प्रसाद बांटा जाता है। इस त्योहार के दिन गौमाता के रूप में अन्नपूर्णा कामधेनु गाय की कहानी सुनाई जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि गौमाता की पूजा से 33 कोटि भगवान की पूजा अर्चना का फल मिलता है।

राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन

राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत कृषि बजट 2022-23 में की गई घोषणा के अनुसार आगामी तीन वर्षों के दौरान सूक्ष्म सिंचाई को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करते हुये राजस्थान सूक्ष्म सिंचाई मिशन लागू किया गया है। मिशन अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में 4 लाख किसानों को 1705 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता से सूक्ष्म सिंचाई संयंत्र स्थापित किये जाने की घोषणा की गई है। इस मिशन के तहत् प्राप्त होने वाले द्विप, मिनी स्प्रिंकलर एवं फव्वारा संयंत्रों पर अनूसूचित जाति, अनूसूचित जनजाति एवं महिला कृषकों को 75 प्रतिशत तथा सामान्य श्रेणी के पुरुष कृषकों को 70 प्रतिशत अनुदान देय होगा।

मदर हीरोइन अवॉर्ड

रूस में मदर हीरोइन अवॉर्ड की शुरुआत साल 1944 में की गई थी। सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने इस योजना को शुरू किया था। स्टालिन ने जब इस स्कीम को शुरू किया था, तब सोवियत संघ की जनसंख्या बहुत तेजी से कम हो रही थी । उस समय सरकार ने घटती जनसंख्या के संकट से निपटने के लिए ऐसी स्कीम शुरू की थी। लेकिन 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया जिसके बाद रूस की सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया। अब एक बार फिर रूस की सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है।

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