समाचारों की दुनिया | सन्डे स्पेशल दिनाँक 06 नवम्बर 2022

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सबसे प्रथम आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

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🍃🌾🌾 *06 NOVEMBER 2022* ♨️ *आज की प्रेरणा* ♨️

सिवाय हमारे विचारों के हमें कोई और नहीं बांधता। सिवाय हमारे डर के हमें कोई और नहीं रोकता। सब कुछ हमारे अंदर ही है।

आज से हम डर पर काबू पायें और विचारों को श्रेष्ठ बनायें।

शिक्षा विभाग में तबादलों का दौर अब थमने वाला हैं

शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने शनिवार को बीकानेर में पत्रिका से बातचीत में कहा कि अब तबादलों पर एक-दो दिन में ही रोक लगने वाली है। शिक्षण सत्र में पढ़ाई सुचारु रूप से चलाने के लिए यह जरूरी है।

डॉ. कल्ला ने कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों के लिए अलग अलग राज्यों की नीतियों का अध्ययन चल रहा है। इसके बाद एक नीति को अंतिम रूप देकर केबिनेट से स्वीकृति के बाद तबादले किए जाएंगे। इसमें मुख्य बाधा जिला मेरिट पर भर्ती का होना तथा इनकी वरिष्ठता प्रभावित होने की आ रही है। इसके लिए यह भी सुझाव आया है कि एक से दूसरे जिले में जाने पर वरिष्ठता शून्य हो जाएगी। इसके लिए तबादले का इच्छुक शिक्षक तैयार हो। दूसरा विकलांग, विधवा परित्यकता, कैंसर और गंभीर बीमारी से पीड़ित और विशेष मामलों में तबादले किए जाएं । जिले के अंदर तबादले किए जा सकते हैं, लेकिन अब नीति को अंतिम रूप देकर ही किए जाएंगे।

विद्या सम्बल योजना राजस्थान 2022 में गेस्ट फेकल्टी हेतु आवेदन करना आसान नही।

विद्या संबल योजना में शिक्षा विभाग की आधी-अधूरी तैयारियों व अधिकारियों के असहयोग्यात्मक रवैये से पात्र लाभार्थियों का मजाक बन रहा है। जिस स्कूल में वैकेंसी बताई जा रही है, वहां अभ्यर्थियों के पहुंचने पर उनसे आवेदन तक नहीं लिए जा रहे।

निजी स्कूलों द्वारा क्रीड़ा शुल्क जमा करवाने में झोल

एक और राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के लिए कई योजनाएं चला रही है। दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन के रुपए बचाने की मनमानी के चक्कर में खिलाड़ियों के साथ अन्याय हो रहा है। शिक्षा विभाग की जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताएं रविवार से शुरू होने जा रही है। ऐसे में, शहर के कई स्कूल प्रशासन के क्रीड़ा शुल्क नहीं देने की वजह से नौनिहाल खेल मैदान में उत्तरने से वंचित हो रहे है।

शिक्षा विभागीय खेलकूद नियमावली के अनुसार शिक्षा विभाग के खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राजकीय व निजी विद्यालयों को प्रति विद्यार्थी निर्धारित दर से शुल्क जमा करवाने के निर्देश के उपरांत भी स्कूलो द्वारा उदासीनता बरती जा रही है।

राजकीय स्कूलों में नहीं कला-संगीत शिक्षक

स्कूल में कला शिक्षा को साल 1992 से अनिवार्य विषय के रूप में माना जाता रहा है। दस वर्ष पूर्व तक ” सृजन ” नामक पुस्तक से प्रश्नोतरी की जाती थी। वर्तमान में कक्षा 01 से 08 हेतु 20 अंको के पांच मूल्यांकन करके विद्यार्थियों को ग्रेड दे दिया जाता हैं। ये विद्यार्थी कक्षा 11 में कला विषय चुनते है वर्तमान में इस विषय के शिक्षक नही होना एक बड़ा प्रश्न भी है।

RKSMBK की परीक्षा समय भरतपुर के चार संस्था प्रधानों को जारी हुआ ” कारण बताओ नोटिस “

राजस्थान के शिक्षा में बढ़ते कदम में आकलन परीक्षा के दौरान लापरवाही व अनिमितताओं के कारण जिला शिक्षा अधिकारी ने चार संस्था प्रधानों को निम्नलिखित आधार पर नोटिस जारी किया है।

  • परीक्षा समय पर प्रारंम्भ नही कराई गई और ना ही पूर्व कोई तैयारी नहीं की
  • बचे हुए प्रश्नपत्र भी खुले हुए परीक्षा कक्ष में पाये गये
  • बिना लिखित सूचना एवं ऑनलाइन अवकाश के विद्यालय में अनुपस्थिति
  • बैठक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
  • ब्लैक बोर्ड व टेबल पर रोल न० अंकित नही थे।
  • डयूटी चार्ज बैठक व्यवस्था और विद्यार्थी उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध नहीं कराये गये ।
  • RKSMBK की परीक्षा समय पर प्रारम्भ नहीं करायी गई और न ही परीक्षा पूर्व कोई तैयारी कि गई

प्रारम्भिक शिक्षा खेलकूद पंचांग 2022-23 जारी

⚜️आज का प्रेरक प्रसंग⚜️ *🌷दिखावे का फल🌷*

मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त एक युवा नौजवान की बहुत अच्छी नौकरी लग जाती है, उसे कंपनी की और से काम करने के लिए अलग से एक केबिन दे दिया जाता है।

वह नौजवान जब पहले दिन office जाता है और बैठ कर अपने शानदार केबिन को निहार रहा होता है तभी दरवाजा खट -खटाने की आवाज आती है दरवाजे पर एक साधारण सा व्यक्ति रहता है , पर उसे अंदर आने कहनेँ के बजाय वह युवा व्यक्ति उसे आधा घँटा बाहर इंतजार करनेँ के लिए कहता है। आधा घँटा बीतनेँ के पश्चात वह आदमी पुन: office के अंदर जानेँ की अनुमति मांगता है, उसे अंदर आते देख युवक टेलीफोन से बात करना शुरु कर देता है. वह फोन पर बहुत सारे पैसोँ की बातेँ करता है, अपनेँ ऐशो – आराम के बारे मेँ कई प्रकार की डींगें हाँकनेँ लगता है, सामनेँ वाला व्यक्ति उसकी सारी बातेँ सुन रहा होता है, पर वो युवा व्यक्ति फोन पर बड़ी-बड़ी डींगें हांकना जारी रखता है.

जब उसकी बातेँ खत्म हो जाती हैँ तब जाकर वह उस साधारण व्यक्ति से पूछता है है कि तुम यहाँ क्या करनेँ आये हो?

वह आदमी उस युवा व्यक्ति को विनम्र भाव से देखते हुए कहता है , “साहब, मैँ यहाँ टेलीफोन रिपेयर करनेँ के लिए आया हुँ, मुझे खबर मिली है कि आप जिस टेलीफोन से बात कर रह थे वो हफ्ते भर से बँद पड़ा है इसीलिए मैँ इस टेलीफोन को रिपेयर करनेँ के लिए आया हूँ।”

इतना सुनते ही युवा व्यक्ति शर्म से लाल हो जाता है और चुप-चाप कमरे से बाहर चला जाता है। उसे उसके दिखावे का फल मिल चुका होता है.

शिक्षा:
कहानी का सार यह है कि जब हम सफल होते हैँ तब हम अपनेँ आप पर बहुत गर्व होता हैँ और यह स्वाभाविक भी है। गर्व करनेँ से हमे स्वाभिमानी होने का एहसास होता है लेकिन एक सी के बाद ये अहंकार का रूप ले लेता है और आप स्वाभिमानी से अभिमानी बन जाते हैं और अभिमानी बनते ही आप दुसरोँ के सामनेँ दिखावा करने लगते हैं ।

*अतः हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम चाहे कितने भी सफल क्यों ना हो जाएं व् लेकीन झूठे दिखावे मे ना पड़े नही तो हमारा भी हाल उस युवक की तरह ही होगा*