राजस्थान शिक्षा विभाग समाचार 2023

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RSR | निलंबन व बर्खास्त में क्या अंतर है ?

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आपने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्त के बारे में सुना होगा। आज जानते हैं इन दोनों में क्या अंतर है और इनसे जुड़े क्या नियम हैं। सस्पेंड (Suspend) का अर्थ होता है निलंबित और बर्खास्त का अर्थ होता है डिसमिस (Dismiss)

बर्खास्त और सस्पेंड में क्या अंतर होता है. साथ ही जानेंगे कि दोनों स्थितियों में सैलरी को लेकर क्या नियम होते हैं, जैसे सैलरी मिलती है या नहीं मिलती है। इसके अलावा जानते हैं किस परिस्थिति में नौकरी वापस पाने का ऑप्शन रहता है या नहीं. जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें, यह सभी बातें एक कार्मिक को अवश्य जान लेनी चाहिए।

बर्खास्त का मतलब होता है नौकरी से निकाल देना। सरकारी नौकरी के परिप्रेक्ष्य में बर्खास्त (Dismissed) होने के बाद वह कर्मचारी किसी दूसरी सरकारी नौकरी के योग्य नहीं रहता। निलम्बन का मतलब होता है किसी सम्भावित आरोप की जाँच के लिए अस्थायी रूप से नौकरी से हटा देना जिससे वह सबूतों से छेड़छाड़ न कर सके।

सरकारी सेवकों के आचरण नियम सरकारी सेवकों को एक निश्चित कार्य करने से रोकते हैं, और एक सरकारी सेवक उन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे दण्डित करने का प्रावधान है।

क्या होता है निलंबन?

निलंबन के दौरान, कर्मचारी की सेवा स्थायी रूप से वंचित नहीं होती है । निलंबन के आदेश के बावजूद कार्मिक अभी भी सेवा का सदस्य बना हुआ है। इसके अलावा, उनके निलंबन की अवधि के दौरान, कर्मचारी को “निलंबन भत्ता” या निर्वाह भत्ता के रूप में जाने जाने वाले भत्ते के साथ भुगतान किया जाता है।

निलंबन करने का मतलब है किसी भी कर्मचारी को सस्पेंड करना। निलंबन को अंग्रेजी में सस्पेंड कहा जाता है. जब भी किसी कर्मचारी को उसके विभाग की ओर से सस्पेंड किया जाता है तो इसका मतलब है कि कुछ दिनों के लिए वो काम नहीं करेगा. इसके समय सीमा कुछ ही दिनों की होती है. किसी भी व्यक्ति को लंबे समय तक सस्पेंड नहीं किया जाता है और उस पर लगे आरोपों की जांच की जाती है।

सस्पेंड की सीमा पूरी होने पर कर्मचारी को वो ही नौकरी, वो ही पद वापस मिल जाता है. खास बात ये है कि जब तक वह व्यक्ति सस्पेंड रहता है तब तक उस व्यक्ति को सैलरी का आधा हिस्सा और महंगाई भत्ता मिलता है और बहाल होने के बाद पूरी सैलरी मिल जाती है. यह एक तरह से दंड के रूप में है और सीनियर अधिकारिक कुछ दिन के लिए निचले कर्मचारी को सस्पेंड कर देते हैं. अगर उस कर्मचारी ने बड़ा अपराध किया है तो उसकी जांच करवाई जाएगी.

निलंबन के पश्चात अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि कर्मचारी पर जो आरोप हैं वह सिद्ध हो जाते हैं और उसने वह अपराध किया है तो उसे नियमानुसार दंड दिया जाता है। जिसमे हो सकता है कि कर्मचारी का पदनाम और वेतन दोनों ही कम कर दी जाये।

अगर मान लीजिए वो कर्मचारी जांच में दोषी पाया जाता है तो उसे बर्खास्त किया जा सकता हैं. यानी बर्खास्त किसी भी कर्मचारी के सस्पेंड होने से आगे की प्रक्रिया है या फिर जांच के आगे की प्रक्रिया है. अब जानते हैं कि आखिर बर्खास्त क्या होता है और बर्खास्त से जुड़े क्या नियम हैं?

क्या होता है बर्खास्त?

एक बर्खास्तगी तब होती है जब नियोक्ता और कर्मचारी के बीच रोजगार का अनुबंध नियोक्ता द्वारा समाप्त कर दिया जाता है । दूसरे शब्दों में, कर्मचारी की इच्छा के विरुद्ध। श्रम संबंध अधिनियम (“एलआरए”) प्रत्येक कर्मचारी को गलत तरीके से बर्खास्त न किए जाने का अधिकार प्रदान करता है।

जिस तरह सस्पेंड होने में कर्मचारी को अपना पद या नौकरी मिलने की संभावना रहती हैं, लेकिन बर्खास्त होने पर ऐसा नहीं होता है. इसे अंग्रेजी में Dismiss कहा जाता है. साथ ही जब किसी कर्मचारी को बर्खास्त किया जाता है, उन्हें सैलरी या कोई भत्ता नहीं मिलता है. खास बात ये है कि कर्मचारी को अगर विभाग ने बर्खास्त किया है तो किसी दूसरी नौकरी के लिए अप्लाई नहीं कर सकता है. वो सरकारी पद पर नौकरी भी नहीं कर सकता और ना ही चुनाव लड़ सकता है.

सरकारी सेवकों की बर्खास्तगी राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1950 के नियम 15 के तहत की जाती है, और यह नियम अच्छे और पर्याप्त कारणों के लिए अन्य दंडों के बीच बर्खास्तगी के दंड का प्रावधान करता है।इसलिए किसी भी सरकारी कर्मचारी को अच्छे और पर्याप्त कारणों से बर्खास्त करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है।

न्यायालय इस आधार पर हस्तक्षेप कर सकता है कि बर्खास्तगी वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील नियमों के नियम 15 के अनुसार नहीं है।

नियम 16 ​​में प्रावधान है कि संबंधित सरकारी कर्मचारी को आरोप सौंपे जाने के बाद, उसे उचित समय के भीतर अपने बचाव का लिखित बयान देना होगा और यह बताना होगा कि क्या वह व्यक्तिगत रूप से सुना जाना चाहता है। यदि वह चाहे तो एक मौखिक जांच की जाएगी जिसमें मौखिक साक्ष्य को सुना जाएगा और जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है वह गवाहों से जिरह करने और अपनी ओर से साक्ष्य देने का हकदार होगा।

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